धर्म जाति से दूर एक अनोखी रामलीला संस्कृति की रक्षा को तत्पर एक विद्यालय

2016-10-13 04:59:17.0

लखनऊ। एक तरफ़ जहाँ समाज मॆं अलग अलग धर्मों मॆं समुदाय विशेष के लिये नफरत पैदा होती जा रही है वही कुछ ऐसे स्थान भी है जहाँ प्रेम के अलावा किसी का प्रवेश नही होता है। हिंदुस्तान मॆं तरह तरह के अलग अलग प्रकार की भक्ति से सराबोर कार्यक्रम अलग अलग समय अंतराल पर होते रहते है किंतु भारत मॆं कुछ ही ऐसे जगह है जहाँ पर धर्म और मज़हब की दीवारो से दूर धर्म के अनुष्ठान होते है। उन्ही जगहो मॆं से एक है लखनऊ का तेलीबाग क्षेत्र के विद्यालय डाक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन पब्लिक इंटर कालेज की बाल राम लीला का जहाँ की नवरात्र के समय होने वाली रामलीला धर्मों की बंधन को तोड़ते हुए लोगो की दिलो मॆं गहरी पैठ बना चुकी है।

बाक्स- क्या खास है इस रामलीला मॆं-
राम की लीलाओं का मंचन जब छोटे छोटे नन्हे मून्हे बच्चो के द्वारा हो तो वह भी बिना किसी सम्वाद को भूले तो तो क्या कहना। विद्यालय राधाकृष्णन की रामलीला कुछ इसी प्रकार से.है। राम सीता तथा लक्ष्मण का अभिनय लड़कियाँ ही करती है जिसमे सबसे मुख्य बात है की सीता का रोल मुस्लिम सम्प्रदाय की सूफिया बानो पिछले चार वर्षों से बेबाकी के साथ अभिनय प्रस्तुत कर रही है।
अक्सर देखा जाता है की विभिन्न प्रकार की रामलीलाओं मॆं सम्वाद समझ मॆं नही आते है किंतु यहाँ की सम्वाद पूर्ण रूप से हिन्दी भाषा मॆं होते है जो आसानी से समझ मॆं आ जाति है। कार्यक्रम मॆं पूरी तरह से संगीत का प्रयोग होता है जो रामलीला को वास्तविकता का रुप देता है।
सम्पूर्ण रामलीला को प्रबंधक श्री आनंद किशोर यादव जी संचालन करते है,मंच निर्देशन विद्यालय की प्रधानाचार्य श्रीमती अर्चना करती है तथा संगीत संयोजन बृजेंद्र बहादुर मौर्य के द्वारा होता है वही स्टेज की साज सज्जा तथा विशेष एफेक्ट डालने की जिम्मेदारी सत्यम दीक्षित के हाथो मॆं होती है। विद्यालय की शिक्षिकाए वस्त्र और वेशभूषा की जिम्मेदारी पूरी करती है तथा साथ ही मयंक गुरुंग शिवम दीक्षित राहुल विश्वकर्मा तथा मोहित दीक्षित कार्यक्रम के विशेष.सँयोजँक के रूप मॆं कार्य करते हुए पिछले दस वर्षों से संस्कृति का निर्वहन करते चले आ रहे है।
रिपोर्ट - नागेश्वर तिवारी

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