वाराणसी:अजा अजन्मा अभया अंबा सी होती है, घर की बेटी माँ लक्ष्मी सी होती है

2017-06-24 18:01:34.0

वाराणसी:अजा अजन्मा अभया अंबा सी होती है, घर की बेटी माँ लक्ष्मी सी होती है

_युवा कवि सम्मेलन 2017_

पिडिट्स सामाजिक संस्था के तत्वाधान में *नई कलम युवा कवि सम्मेलन 2017* का आयोजन बनारस के अस्सी घाट पर आज 24 जून 2017को शाम 6:00 बजे से आयोजित किया गया । इस आयोजन में प्रदेश के तथा दिल्ली के कई नवोदित कवि सहभागिता निभाई
कवि नन्द शंकर पाठक ने ' मैं आर्यावर्त का चारण हूँ भारत वंदन गाता हूँ ' से भारती का यशोगान किया , कवि आर्यन उपाध्याय ऐरावत ने ' अजा अजन्मा अभया अंबा सी होती हैं
घर की बेटी माँ लक्ष्मी सी होती हैं' से बेटी बचाओ का संदेश दिया , कवि अमन शुक्ला शशांक ने कूट कूट देशभक्ति भारती से प्यार हो।
हर इक व्यक्ति में रवानी होनी चाहिए।।
माशुकाओं पे तो सभी जान छिड़क देते हैं।
देश पर जो मर मिटे जवानी होनी चाहिए ' की ओज पूर्ण प्रस्तुति की, कवि शशिकांत सिंह आनेह ने उसके सर पर पल्लू है तो सही है
पर हाँथ में कलम होती तो बात कुछ और होती। से तालियाँ बटोरीं , कवि अभी पण्डित ने ' प्रिये तुम्हारी प्रेम में पडकर फ्युचर का रूख मोड़ दिया,
जिसपर इश्क लिखा था तूने कालेज मे बुक छोड़ दिया ' से श्रोताओं को गुदगुदाया , कवयित्री रेखा ने "धन्य धन्य है धरती जिस पर ऐसे वीर जावन हुए।
मात्रभूमि के खातिर जो हँसते हँसते कुर्बान हुए' से ओज की समाँ बाँध दी , कवि गौरव पाठक ने मैंने जान बचा के रखी है, एक जान के लिए

इतना इश्क कैसे हो गया, एक अनजान के लिए.' सुनाया , कवि मनमोहन माहेव ने
तेरे नाज़नी शरारतों का काफि़ला याद आया जब देखा,
भौरों को चूम जाते हुए झूमते फूलों को अक्सर ' सुनाया । संचालन शैलेंद्र पांडेय ने किया । कार्यक्रम के मुख्य अतिथि - श्री स्कन्द गुप्त ( खंड शिक्षा अधिकारी वाराणसी ) एवं विशिष्ट अतिथि - डॉ० आनन्द कुमार ( केजीएमयू ) , श्री अरविंद सिंह ( व उपा० शिक्षक संघ ) एवं श्री सौरभ दीक्षित जी रहे ।


ब्यूरो रिपोर्ट
अंजुम कादरी

  Similar Posts

Share it
Top