500 रुपए दीजिए और 10 मिनट के अंदर किसी का भी आधार डेटा आपका

2018-01-04 12:07:50.0

500 रुपए दीजिए और 10 मिनट के अंदर किसी का भी आधार डेटा आपका

Cover by : anjum अंजुम कादरी [Edited by : रितिका सिंह]
सरकार हमेशा ये दावा करती है कि आधार के डेटा बिल्कुल सुरक्षित हैं लेकिन एक नियमित अंतराल पर आधार डेटा लीक हो जाने या लोगों की जानकारियां चुराने की खबरें आती हैं जिससी सरकारी दावे की पोल खुल जाती है. ऐसे में इस बात पर यकीन करना मुश्किल है कि हमारा और आपका आधार डेटा सुरक्षित है.

द ट्रिब्यून की खबर के मुताबिक अगर आपको आधार डेटा चाहिए तो बस पेटीएम के माध्यम से 500 रुपए देना होगा और 10 मिनट के अंदर आपको सारी जानकारी मिल जाएगी. खबर के मुताबिक, एक रैकेट है जो कि गेटवे नाम के माध्यम से आपको लॉग इन और पासवर्ड देगा. इसके बाद आप किसी का भी आधार नंबर उसमें डालिए आपको उस नंबर पर उपलब्ध सारी जानकारियां मिल जाएगी. पिन कोड से लेकर मोबाइल नंबर और आपकी मेल आईडी तक. और इसकी कीमत आपको चुकानी होगी सिर्फ 500 रुपए.

प्रिंट भी करा सकते हैं

यह रैकेट इतना संगठित तरीके से काम करता है कि आपको ये सिर्फ जानकारी ही नहीं देंगे बल्कि अगर आप किसी का भी आधार प्रिंट कराकर रखना चाहते हैं तो उसकी भी व्यवस्था है इनके पास. आपको 300 रुपए देने होंगे ये रैकेट के लोग आपको एक ऐसा सॉफ्टवेयर मुहैया कराएंगे जिसके जरिए आप आधार का प्रिंट भी निकाल सकते हैं. इन बातों से ये तो साफ हो गया होगा कि आपका आधार कितना सुरक्षित है.

इस सारे घटना क्रम को समझने के बाद जब यूआईडीएआई से संपर्क किया गया तो उसने इस मामले को गंभीर माना और स्वीकार किया कि यह देश की सुरक्षा के लिए एक खतरा है. यूआईडीएआई के चंडीगढ़ सेंटर के एडिशनल डायरेक्टर जनरल संजय जिंदल ने कहा कि पंजाब में मेरे अलावा और डायरेक्टर जनरल के अलावा किसी के पास भी लॉग इन आईडी और पासवर्ड नहीं है. अगर किसी के पास है तो यह अवैध है. उन्होंने कहा कि वो इस मामले को जल्द से बेंगलुरु स्थित यूआईडीएआई के टेक्निकल टीम के पास ले जाएंगे.

आधार सुरक्षा खतरे में

इस पूरे मामले में जो जानकारी आई है वो चौंकाने वाली है. 6 महीने पहले एक लगभग तीन लाख विलेज लेवल एंटरप्राइज (वीएलई) को टारगेट कर वॉट्सएप ग्रुप बना था. मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के कॉमन सर्विस सेंटर स्किम के अंदर ये वीएलई आधार कार्ड बनाने का और उसमें बदलाव का काम करते हैं. ऐसा माना जा रहा है कि लगभग एक लाख वीएलई के पास अवैध तरीके से लॉग इन और पासवर्ड उपलब्ध है और इनके ही माध्यम से यह सब काम हो रहा है.

ऐसा लग रहा है कि हैकर्स ने राजस्थान सरकार की बेवसाइट को भी हैक कर लिया था जहां से आधार को प्रिंट कराने का सॉफ्टवेयर उन्हें हासिल हुआ. इस बात की अभी पूरी सच्चाई सामने नहीं आई है कि जिस वेबसाइट से प्रिंट करने का सॉफ्टवेयर लिया गया है वह राजस्थान सरकार की है या उस पर बरगलाने के लिए ऐसा लिखा गया है.

आधार डाटा लीक होने से यह साबित हो रहा है कि निजता को सुरक्षित रखने में यह फेल हो गया है.
Covered by
अंजुम कादरी
प्रदेश प्रभारी उत्तराखण्ड

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